सर्वगुणसम्पन्न

By: Suchita kumari

सर्वगुणसम्पन्न

मि.शीला के छोटे बेटे सूरज का आज इंगेजमेन्ट है.घर में काफी चहल-पहल लग रही है.उन्होंने बहुत देखभाल करके सर्वगुणसम्पन्न लड़की खोजकर लायी है जो देखने में खूबसूरत है ही साथ ही पढ़ी-लिखी भी है और सबसे ॿडी बात कि लड़की के पिता काफी मालदार पार्टी हैं तो जाहिर है कि लेनदेन में कोई  कमी नहीं रखेंगे.

शीलाजी ने अपने बड़े बेटे की शादी में इतना काट-छांट नहीं कियाथा.पहली बार जिस लड़की का रिश्ता आया उसके साथ ही ॿड़े बेटे की शादी करवा दी थी.पर बड़ा ॿेटा एक टीचर है इसलिए कोई भी लड़की जंच गयी पर सूरज इंजीनियर है वो भी विदेश में तो उसके लिए लड़की तो खास होनी ही चाहिए.पहले ही सारे रिश्तेदारों को कह दिया था कि सूरज के लिए ऐसी लड़की दिखाए जिसमें कोइ कमी न हो.और बड़ी बहु के घरवाले पैसेवाले नहीं थे तो उसकी शादी में कोई खास समान नहीं मिल पाया इसलिए शीलाजी छोटे बेटे के लिए ॿड़े घर की लड़की देख रहेीथी.बहुत देख सुनकर यह रिश्ता तय हुआ था.

तो शीलाजी के बेटे की शादी हो गयी बहु इतना सारा सामान लेकर आयी कि घर भर गया. शादी के चार दिन बाद सास ने नयी बहु को बुलाकर कहा "बहु आज तेरे रसोई का रस्म है आज कुछ ऐसा बनाना कि सब उंगलियां चाटते रह जाए."

" पर मम्मी जी मुझे खाना बनाना नहीं आता."

"क्या ,अच्छा कोई बात नहीं ,बड़ी बहु तुझे सब सिखा देगी."

"पर मम्मीजी मेरे बदले दीदी ही खाना बना लेगी तो क्या हो जाएगा मैं रस्म के नाम पर एक पूरी बना लूंगी."

"ठीक है अब तु जा ."

 

अब शादी के 15 दिन बीत गए कल सूरज को वापस विदेश जाना है ,छुट्टियां खत्म हो गयी है.सास नयी बहु से आकर बोलती है,"अरे बहु सूरज का सारा सामान पैक कर दिया है ना."

"जी मम्मीजी हमने अपना सारा सामान पैक कर लिया है."

"अपना मतलब तु भी उसके साथ जाएगी ."

"जी,मैं यहाँ रहकर क्या करूंगी."

"अरे बहु पति के साथ तो जिन्दगी भर रहना है,कुछ दिन तो यहाँ  रह जाती."

"पर मम्मीजी मुझे छोटे शहर में रहने की आदत नहीं  है ,इतने दिन मैंने बड़ी मुश्किल से यहां बिताए हैं."

"ठीक है तो तु भी चली जा."

इस तरह नयी बहु अपने पति के साथ चली जाती है.घर में फिर से पहले की भांति सन्नाटा हो जाता है ,पहले सूरज की शादी होगी इस बात की खुशी रहती थी  पर अब वो खुशी भी चली गयी.

शीलाजी अकेले अपने कमरे में बैठी हैं तभी बड़ी बहु खाना लेकर आती है,"मांजी आप अकेले बैठी हैं,आपने खाना भी नहीं  खाया."

शीलाजी कुछ नहीं बोलती हैं.

"देवरजी और देवरानीजी चले गए इसलिए आप दुखी हैं, तो क्या हुआ हमलोग हैं ना आपके साथ." अपने हाथ से सास को खाना खिलाती है.शीलाजी बहु को गले लगा लेती हैं.