एहसास....

By: Babita Mishra

एहसास....

ढूँढती थी जो नजर वो तलाश हो तुम 
मोहबत्त की पहली एहसास हो तुम 
तुमसे शुरू तुमसे ही ख़त्म 
मेरे जीवन की वो किताब हो तुम 

मिले  है हम रब की मर्ज़ी से 
इस बात से क्या अनजान हो तुम 
एक जन्मो का ये प्यार नहीं 
मेरे दुआ की वो सौगत हो तुम 

जीवन  की उलझन में जब उलझी
सुलझन बन कर  आए तुम 
छोड़ोगे  ना मेरा दामन कभी
मेरे विश्वाश की वो एहसास हो तुम
ढूँढती थी जो नजर वो तलाश हो तुम...

 

             बबीता मीश्रा
       विकास पूरी न्यू दिल्ली-18