मर्द का गुनाह

By: Naresh Kumar

मर्द का गुनाह?

जी हां मर्द होना ही है उसका गुनाह,

बात बराबरी की होती है,पर क्या दोनों पलड़े बराबर है,

मर्द और औरत नाम के पलड़े।

बचपन से बुढापे तक जिम्मेदारियों से लदा हुआ,

मर्द नाम का तमगा सीने पर लादे,

अंदर से लाजार,जर्जर बाहर से घर का मजबूत स्तंभ।

वाह रे मर्द तेरी यही कहानी, वैसे तो मुंछो को ताव

पर असल में सर पे कांटों का ताज।