शायरी : उम्मीद

By: Ami Sharma

नम आखें, हताश समा हो, हार का बोझ जब सबसे बड़ा हो

वो हाथ में हाथ देके, बस मुस्कुरा दे अपनी गर्मजोशी से

दुनिया से लड़ जाऊ, ऐसी ताकत सी जगती है

घने अंधियारो में भी वो मेरे जीवन का दीपक बनती है

ज़रा ध्यान से देखो, उम्मीद मेरी माँ जैसी दिखती है