इश्क, विश्क, प्यार ब्यार तुम्ही मगर ! - ZorbaBooks

इश्क, विश्क, प्यार ब्यार तुम्ही मगर !

जब जब गम की बात होगी

निस्संदेह तब मेरी बात होगी!

चांदनी रात में हाँ तुम्ही मगर

अहले सुबह जरूर मेरी बात होगी

अल्हड कमसिन हाँ तुम्ही मगर

मेहनत पर जरूर मेरी बात होगी

बसंत, ओला के झोके हाँ तुम्ही

आँधियों पर मगर मेरी बात होगी

इश्क , मुहब्ब़त , प्यार , ब्यार हाँ

                            तुम्ही मगर

फ़ना होने पर मेरी ही बात होगा!

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rahulkiran733