तुम्हें छूना

तुम्हें छूना
जैसे उबलते दूध पर
हल्की फूंक

जैसे कल्ले फोड़े
कोई ठूंठ

जैसे अनंत सिहरन को
मिले न्योता
जैसे रोशनदान पर
ख़्वाबों का
खोता।

 

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अभिज्ञात