कब तक

कब तक छुपाओगे

वो आँसुओं का सैलाब

जो एक दिन उतर आएगा।

 

कब तक उठाते रहोगे

वो दर्द का भार

एक दिन कम हो जाएगा।

 

कब तक एकांत में रहोगे

समझकर भावनाओं का धार

कोई साथ निभा जाएगा।

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अदिति अन्विता