खुशियां

जो वाकिफ नहीं दर्दनाक दुनिया से

स्वार्थ की घुटन में हांफती खुशियां।

अंधेरे की दौड़ में विलुप्त इंसानियत

अच्छाई नहीं रहती यहां नीरस होती खुशियां।

कोई जरूरतमंद पुकार कर चला गया,

उबकर मोबाइल चलाती खुशियां।

सदियों से बंद पड़ा यादों का एल्बम

तस्वीरों को जमा करती खुशियां।

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अदिति अन्विता