ख्वाब

लिखती वो हूं जो कुछ कह ना सकी 

और कुछ जो कर ना सकी 

मगर उनके बीच 

कुछ दवे हुए पांव से आते हुए ख्वाब 

कई रात जगाए रहते हैं ।

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अदिति अन्विता