चैन

मंजिल मिले तो इस तरह 

की एक नई ऊंचाई को छूने की चाहत जगे,

कभी अहंकार में जो इतराने लगे 

तो सच्चाई का पता लगे, 

जिस जगह पर मुझे है यह सुकून, 

वहां दूसरों को चैन कहां।

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अदिति अन्विता