छोड़ो भी अब
छोड़ो भी अब,
इन बीती हुई बातों में क्या रखा है?
मगर उनका का क्या कहना,
जिनको हम वक्त के पन्नों पर उतर न सके,
कि जिंदगी की किताब तो उनके बगैर आज भी खाली हैं।
छोड़ो भी अब,
इन शिकायतों में क्या रखा है?
मगर उनका क्या कहना,
जो बचकाना लगते हैं, और उनकी हम बात नहीं करते,
कि ये मुस्कुराहटें उनके बगैर आज भी अधूरी हैं।
छोड़ो भी अब,
इन बीती हुई बातों में क्या रखा है?
मगर उनका का क्या कहना,
जिनको हम वक्त के पन्नों पर उतर न सके,
कि जिंदगी की किताब तो उनके बगैर आज भी खाली हैं।
छोड़ो भी अब,
इन शिकायतों में क्या रखा है?
मगर उनका क्या कहना,
जो बचकाना लगते हैं, और उनकी हम बात नहीं करते,
कि ये मुस्कुराहटें उनके बगैर आज भी अधूरी हैं।
छोड़ो भी अब,
ये पूरानी कहावतों में क्या रखा है।
मगर उनका क्या कहना,
जो आज भी जरूरी लगते हैं, उनका चलन होता आ रहा है,
कि ये गपशप तो उनके बगैर आज भी अधूरी है।