तारीफ

आपस में बातें करते हैं 

चांद तारे बड़बड़ाने लगते हैं 

और क्या लिखूं तारीफ में इसकी 

हम अपने आप में गुनगुनाने लगते हैं ।

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अदिति अन्विता