दोबारा

आज फिर तुमसे कुछ कहना है 

सब कुछ याद आने के बाद 

तुमसे दोबारा से प्यार हुआ है 

तुम्हारे देखने का नजरिया 

तुम्हारे होने का सबब 

अब यादगार हो चुका है 

अब रह लेने दो अपनी बाहों में 

हम आसमान की पंछी 

को बस एक तुम्हारा ही आसरा है। 

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अदिति अन्विता