पड़ाव

मैं वह जो तुम्हें छुए बिना 

तुम्हारे रूह की बात समझ सकती हूं 

मेरे जाने पहचाने ख्वाब का 

आखिरी पड़ाव हो तुम।

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अदिति अन्विता