परिंदे

परिंदे सोच में है,

हर तरफ खामोशी क्यों है 

यह इंसानों में उदासी क्यों है 

उनके घरों को तोड़कर 

ऐसा क्या बना लिया उन्होंने।

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अदिति अन्विता