यह जो अक्सर
यह जो अक्सर रौंद कर चले जाते हो
मेरे मन के जख्मों को,
कभी रुक कर देखो उनके गहराइयों को
क्या पता तुम्हें अपनी कोई झलक दिखाई दे।
यह जो अक्सर कैद कर देते हो
मेरे सजाए अरमानों को,
कभी झांक कर देखो अपने अंदर
क्या पता तुम्हें अपना कोई अधूरा ख्वाब दिखाई दे।
यह जो अक्सर भूल जाते हो,
हमारी उन पुरानी बातों को
कभी मुड़कर देखो
क्या पता तुम्हें अपना कोई यादगार पल दिखाई दे।