रोशनी

गमों के अँधेरों को हरा कर, 

एक नयी ज़िन्दगी देती रोशनी, 

है वो आशा की एक किरण, 

सबको उम्मीद देती रोशनी।  

कभी जो भटक जाओ तुम, 

दबे पाओं से आके, 

चुपके से जागा के, 

रास्ता दिखाती रोशनी।  

निराश होकर बैठे हैं, 

खुशियाँ नाराज है जिनसे, 

मुस्कान से मिला कर, 

राहत की सांस लेती रोशनी।  

कोई अजनबी परछाई डराए 

अकेलेपन में किसी को, 

या जब नीरस हो जाए वक्त  

सवेरे से वाक़िफ़ करवाती रोशनी।  सबमें अच्छाई बँटना, 

सीखाती है रोशनी, 

जब सब हार कर बैठ जाते हैं, 

तब जीत की उम्मीद लाती रोशनी।

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अदिति अन्विता