रोशनी

कहां हम रोशनी की तलाश में निकले थे 

अंधेरों ने एक नया मतलब दिया जिंदगी का 

अब अक्सर रोशनी में चौंधिया जाती हैं आंखें मेरी।

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अदिति अन्विता