वह लड़की

वह लड़की 

अक्सर दिखती है मुझे 

डरी हुई सहमी सी 

घर के किसी कोने में 

अपनी बाहों को बंद करके 

दीवार की तरफ नजरे किए 

मैं करीब जाऊं या दूर 

वो वैसे ही रहती है 

मगर फिर एक दिन 

अपनी आहट को तेज करके 

उसके करीब गई 

उसके कंधे पर हाथ डाला 

और उसके सिर को सहलाया 

पर भी डर था 

शायद उसमें आवेश भी था 

कि वह कभी कुछ बोल नहीं पाई 

मेरी आंखों में देखकर 

मेरी तरफ हो कदम बढ़ाई 

और मुझे जोर से पकड़ लिया 

मैंने उसे अपनी बाहों में सुला दिया 

जब जागी तो खुद को आईने में पाई।

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अदिति अन्विता