सोचा है

हमने सोचा है अब हार कभी मनाना नहीं 

आधे रास्ते से लौट जाना नहीं 

कोई ख्वाहिश अधूरी रखती नहीं 

कोई साथ दे या नहीं 

डरकर घबराकर रह जाना नहीं। 

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अदिति अन्विता