हिम्मत

मगर उसके सपने में मकान तो कभी था ही नहीं 

कोई अपने सम्मान के कब्र पर नींव नहीं रखता,

उसने कुछ चाहा था तो एक घर 

उसकी खिलखिलाती ख्वाहिश 

असलियत का रूप लेते हुए 

और गुर्राती हुई उसकी हिम्मत।

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अदिति अन्विता