अभाव का ही मूल्य होता है

अभाव का भी मूल्य होता है।

जो अनुपस्थित है, वही सबसे ज़्यादा मूल्यवान होता है।

हवा दिखती नहीं, पर जीवन उसी से चलता है।

जल सर्वत्र हो तो उसका मूल्य गिर जाता है;

सूखा पड़े तो एक घूँट अमृत हो जाता है।

यही नियम धर्म पर लागू होता है।

आज कोई धार्मिक नहीं है —

इसलिए धर्म मूल्यवान है।

यदि सच में 2–4 भी बुद्ध पुरुष प्रकट हो जाएँ,

तो भीड़ की सारी नक़ली आध्यात्मिकता ढह जाएगी।

क्योंकि तब सत्य दुर्लभ नहीं रहेगा,

और जो दुर्लभ नहीं — उसकी दुकान नहीं चलती।

भीड़ इसलिए है क्योंकि सत्य नहीं मिलता।

पुण्य इसलिए बिकता है क्योंकि

कहा जाता है — पुण्य मिलेगा तो सत्य मिलेगा।

और सत्य पाने की यह भीड़

करोड़ों में है।

क्योंकि कहा जाता है—

यात्रा से मिलेगा

साधना से मिलेगा

मार्ग से मिलेगा

त्याग से मिलेगा

कर्मकांड से मिलेगा

सेवा से मिलेगा

लेकिन सत्य कभी मिला ही नहीं।

सत्य किसी विधि से नहीं मिलता,

क्योंकि वह पहले से है।

आत्मा कोई वस्तु नहीं

जो बाहर से लाई जाए।

वह तुम्हारे होने का कारण है।

जो पहले से है, उसे पाया नहीं जाता —

उसे उघाड़ा जाता है।

समस्या यह नहीं कि आत्मा नहीं है।

समस्या यह है कि—

अहंकार

अज्ञान

मान्यता

धारणा

अंधविश्वास

पाखंड

इनकी मोटी परतें

उसे ढँके हुए हैं।

जैसे ज़मीन के नीचे पत्थर है —

पत्थर को कुछ करना नहीं पड़ता।

बस मिट्टी हटानी पड़ती है।

जितनी मिट्टी हटेगी,

पत्थर उतना प्रकट होगा।

लेकिन धर्म ने क्या किया?

मिट्टी हटाने के बजाय

ऊपर और मिट्टी डाल दी।

तप, त्याग, भूख, प्यास, कष्ट —

इन सबका प्रदर्शन किया गया

ताकि लोगों की नज़र

भीतर के सत्य से हटकर

परिश्रम के तमाशे पर चली जाए।

और फिर कहा गया—

“यही ईश्वर है,

यही आत्मा है,

यही ब्रह्मलीन है।”

यह झूठ है।

आत्मा छुपी नहीं है।

ईश्वर दूर नहीं है।

ब्रह्म कहीं गया नहीं।

जो हटाना है वह हटाओ— धर्म का कचरा,

पाखंड का वायरस।

बस।

कोई साधना नहीं चाहिए,

कोई मार्ग नहीं चाहिए,

कोई गुरु नहीं चाहिए।

सत्य उत्पन्न नहीं होता।

सत्य प्रकट होता है।

और यही बात

यदि धर्म साफ़-साफ़ कह दे —

तो उसकी सारी दुकानें

एक दिन में बंद हो जाएँ।

यही कारण है

कि सत्य को कभी स्पष्ट नहीं किया गया।

— 🙏🌸 —

A̳ ̳P̳h̳i̳l̳o̳s̳o̳p̳h̳y̳ ̳t̳h̳a̳t̳ ̳T̳r̳a̳n̳s̳f̳o̳r̳m̳s̳ ̳S̳p̳i̳r̳i̳t̳u̳a̳l̳i̳t̳y̳ ̳i̳n̳t̳o̳ ̳a̳ ̳S̳i̳m̳p̳l̳e̳ ̳S̳c̳i̳e̳n̳c̳e̳

Agyat agyani

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