ज़िंदा लाश।

वो लड़की होगी, चिंखी चिल्लाई होगी,

क्या किसी के कानों तक आवाज ना आई होगी,

क्या किसी ने सुना नहीं
होगा क्या किसी ने देखा नहीं
होगा

क्या किसीको अपनी बहन या
बेटी याद ना आई होगी,
अगर इतनी आग थी तो खुद को
जला लेता तू,
हवस की हद भी उसे याद आई
ना होगी,
देवताओं की धरती पर रह
रहे असुर यहां,

जो जिंदा जली उसने भी तो रब
से गुहार लगाई होगी,
सोचो क्या बीती होगी उस बाप
पर,
जिसने डोली की जगह अपनी
बेटी की अर्थी उठाई होगी।

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AKASH THAKUR