कोरोना कोरोना
अब खुद को भी थोड़ा आराम दो ना
साथ बैठो घड़ी भर और बात करो ना
भागती ज़िन्दगी से कुछ लम्हे चुरा लो ना
देखना भाग जाएगा, ये मुआ कोरोना
इस इतवार क्यों तुम हमसे कुछ अपनी कहो ना
और कुछ तुम हमारी दिल की भी सुनो ना
सिमटकर एक दूजे में चलो एक उम्र जी लो ना
इस मसरूफ ज़िन्दगी को कुछ आराम दे गया कोरोना
भटकते फिरे इस जहाँ भर में तुम कितना
लेकर पानी आँखों में समंदर का कितना
खेते रहो कश्ती दरिया में, दूर नहीं साहिल इतना
लड़कर आये तुम तूफ़ानो से, क्या रोकेगा कोरोना