दिल की आवाज़
दिल के अरमान दिल में ही रह गए
ना मिला दिल का सुकून और हम तन्हा रह गए
मेरा बार बार तुझे याद रखने की आदत है
तेरी हर एक tasveer मे naye रंग भरने की हसरत है
मगर क्या करुँ इस ज़माने का जिसे तेरी रंगत मिटाने की चाहत है
कोई तनहाई मे रोता हैं
कोई मातम मनाता हैं
जहाँ पे ना हो कोई आशा
कोई खुशहाली पाता है
जो सारे बन्धन तोड़कर
जीने की कला है सीख ले
उसी का परचम दुनियाँ है तो मानती