दिल की आवाज़

दिल के अरमान दिल में ही रह गए 

ना मिला दिल का सुकून और हम तन्हा रह गए 

मेरा बार बार तुझे याद रखने की आदत है 

तेरी हर एक tasveer मे naye रंग भरने की हसरत है 

मगर क्या करुँ इस ज़माने का जिसे तेरी रंगत मिटाने की चाहत है 

 

 

कोई तनहाई मे रोता हैं 

कोई मातम मनाता हैं 

जहाँ पे ना हो कोई आशा 

कोई खुशहाली पाता है

जो सारे बन्धन तोड़कर 

जीने की कला है सीख ले  

उसी का परचम दुनियाँ है तो मानती 

 

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Ankit kidder