तुम कहा जा रहे हो?

 तुम कहा जा रहे हो?

झिदंगी कि जद्दोजहद
मे उलझे हुए तुम,
पैसे कमाने के चक्कर मे
पागल से हुए तुम,
थोडे ख्वाब, चंद उम्मीदे,
थोडा डर, अधूरी ख्वाहिशे,
सिमट कर खुद मे,
जो तुम भाग रहे हो,
तुम कहा जा रहे हो?

जरा सुनो, ये झिदंगी
तुमसे कुछ कह रही है।
थोडा रूक जाओ।
एक गहरी सांस लो,
जहा तुम अभी हो ना,
वो वक्त वापस नही आएगा।
इस लम्हे को तुम पूरा जी लो,
तुम्हे पता है ना, मंजिले बदलती रहेंगी,
पर रास्ते हमेशा खूबसूरत होंगे।
ये इतनी ज़रूरी बात भूलकर,
बताओ, तुम कहा जा रहे हो?

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Anuradha Phatak