बारिश और हम तुम

  ‘बारिश और हम तुम’

याद आती बारिश की शाम,एक ही छतरी में भींग रहे थे।

गीले कपड़ों में चलते हुए, रिमझिम बूँदों को चूम रहे थे।

तुम से दिन-शाम रौशन, जीवन पतझड़ में भी लगे गुलशन।

बारिश और हम तुम अल्हड़ से मस्त बूँदों की झंकार में गुम।

एक सिक्के के हों दो पहलू जैसे दीया-बाती,चांद चकोर जैसे।

मध्म-मध्म मधुर तरंग हिय में तरंगित हो हिलोरे ले रहे थे ऐसे।

इंद्रधनुषी रंग अंबर से अंतर्मन में उतर नवचेतन भर रहे हों।

दिल के सोए अरमान रह रहकर जैसे मचल-मचल रहे हों ।

शीतल पवन तन-मन को छू कर सुंदर जुल्फों को बिखेर देते। 

आंचल, छतरी उड़-उड़कर कोमल मन को पुलकित कर देते।

झूम-झूमकर प्रेम रस में लीन, छपाक छई हम करते जाते। 

दिल बचपन और उम्र पच्चपन का हुआ इक-इक पल जैसे।

यादों की हैं दास्ताँ कई मन मस्तिष्क पर निशान छोड़ देतीं।

सुनहरी याद लिए आज फिर दस्तक सावन की बूँदें हैं देतीं।

*अर्चना सिंह ‘जया’

#LoveStorieslnverse

Comments

Felt something? How about posting a comment below...

  1. Superb as usual

  2. Naina Agarwal says:

    Amazing

  3. theoristcheerfullyfa6d289da9 says:

    Beautiful words

  4. Amazing

  5. Beautiful poem!

Leave a Reply

अर्चना सिंह जया
Uttar Pradesh