मैं डटा रहूँगा…
क्या हुआ अगर मेरे चलते ही मेरा सामना तूफानों
से होगा,
मैंने पर्वतों की तरह अचल रहना सीख लिया है।
क्या हुआ अगर मेरे कदम बढ़ाते ही,आग का दरिया मेरे सामने आ पङेगा,
मैंने महासागरों से नाता जोङ लिया है।
मैं बेजान सा खङा था,दुनियाँ की अँधेरी गलियों में,किसी सुखद सुबह की तलाश में,
पर अब मैंने सूर्य से तेज का वरदान ले लिया है।
चल पङा हूँ,ग्रहों की गति की तरह,
रुकना मेरे लिए विनाश है,
मैं कोई मोम का पुतला नहीं,जो पिघल कर बह जायेगा,
फौलाद मेरे सीने में,चट्टानों सी मेरी आस है।।।