शशक्त नारी
नारी के बदलाव की कहानी हैं,
हर नारी की जुबानी हैं,
वक्त बदला, वक्त की रफ्तार भी,
शशक्त हुआ नारी का स्वभाव भी
अब अबला नही,न रोती बिलखती कहानी हैं।
नारी शशक्त हैं, हर काज करने की ठानी हैं।
जो रोक सके वेग हमारे,ऐसा कोई तूफान नही हैं।
बीच मझधार में जो टूटे,ऐसी कश्ती हमारी नही हैं।
जीत सकते हैं हुम् हर जंग,बदलेंगे दुनिया का रंग।
आज नारी की शक्ति नारी ने पहचनी है,
करना है युग परिवर्तन,
यह हर नारी ने ठानी हैं।।