तुम्हारे दिल में रहते हैं

तुम्हारे दिल मे रहते है
तुम्हारे ये दिल से कहते हैं
मोहब्बत हो मेरी जो तुम
तुम्हारे नखरे सहते है
मिलो जो तुम मुझे वैसे
जैसे दरिया समंदर मे बहते है
कि महल का शौक नहीं मुझको
जो तुम्हारे दिल मे रहते है
तुम्हीं हो आरजू मेरी
और तुम्हे ही  जान कहते हैं
मै जो लफ्जों मे बयां कर दूं
उसे इश्क पुराण कहते हैं
जो रातों मे निकल जाये मुझे पागल
और तुझे जो चांद कहते है
तुम्हारे दिल मे रहते है
तुम्हारे ये दिल से कहते हैं।

Comments are closed.

ashishgupta8383