जिंदगी मेरी कलम से
किनारों की क्या औकात की वो लहरों को थाम सके
पर लहरों को किनारों से मिलना तय है
और लहरों की क्या बिसात की वो किनारों को हटा सके
पर किनारों को लहरों के लिए ठहरना तो तय है
किनारों की क्या औकात की वो लहरों को थाम सके
पर लहरों को किनारों से मिलना तय है
और लहरों की क्या बिसात की वो किनारों को हटा सके
पर किनारों को लहरों के लिए ठहरना तो तय है