वो लम्हा भी कितना हसीन था
सर्दी में भी उसे गर्मी का एहसास हो रहा था
बड़ी दूर से चल के आयी होगी तभी उसका ये हाल हो रहा था
आते ही मुस्काआन दी थी उसने
जैसे कोई तारा चाँद को ताक रहा था
पसीना निकल उसके माथे से
इस कदर गुजर रहा था
मानो जैसे उसके लबो को चूम रहा था
रुमाल निकाल के वो पोछ अपना मस्तक रही थी
तभी देख उसे मै मुस्कुरा रहा था
वो लम्हा भी कितना हसीन था
-आयुष शर्मा