बेगम बेग़ैरत निकली
उसने कहा मैं जा रही हूँ
मैं नादां समझा, मनाने के लिए कह रही है
रूठना, मनाना, रूठकर मान जाना
उसकी आदत रही है
मुझे क्या पता सनम राजनीति हो रही है
जब चमक थी मेरे पास
वह खिंच आई थी चुम्बक की तरह
मैंने भी आलिंगन दिया शुद्ध लोहे की तरह
अब बेग़म बेग़ैरत निकली
खिसक गई है दूर हमसे
नवल कोरोना के डर से
बहाना अच्छा था
लगा लिया था कालाबाज़ारी का मास्क
महँगे दामों खरीदकर,
मुँह मोड़ लिया हमसे उन्होंने
हँसकर निकल गई वह दूर से।