घुटता प्रेम
भुलु अगर मैं उस पल को,
पर याद कौन मिटाएगा ।
चलो रोक लूँगी मैं यह सावन,
घर लोट के क्या तु आयेगा ।
क्यूँ रूठे थे तुम ,
क्या गुजारिशें थी अधूरी ,
किस बात से यह हालात बनें ,
कौन सी शिकायते थी जरूरी ।
केह दो ना , कहो ना
दुर से सही, पर कहो ना।
पूरी पूरी रातें खाली
रूबरू ना सही, यादों मे तो रहो ना।
तुम्हे क्या पता तन्हाई क्या होती है
तुम मेहफिल के सितारे हो, जुदाई क्या होती है