जिस घर में माँ मुस्कुराती है, वहाँ खुशियाँ रहती हैं
माँ कोई शब्द नहीं,
एक पूरा संसार होती है,
जो बिना कहे हर दर्द समझे,
वही तो माँ कहलाती है।
जब दुनिया ने ठुकराया,
उसने चुपके से गले लगाया,
मेरी हर टूटी हुई उम्मीद को
अपने आँचल में फिर सजाया।
खुद भूखी रहकर भी
मेरी थाली भर देती है,
मेरी छोटी सी मुस्कान पर
अपनी सारी थकान भूल जाती है।
रातों की नींदें बेचकर
मेरे सपने खरीद लाती है,
मेरे हर डर के आगे
वो चट्टान बन जाती है।
माँ का प्यार नदी जैसा,
जो बस बहना जानता है,
बिना किसी शर्त के
सिर्फ अपना बनाना जानता है।
कभी डाँट में छुपा स्नेह,
कभी आँखों में दुआ होती है,
माँ के बिना ये दुनिया
सच में अधूरी सी लगती है।
अगर भगवान दिख जाए कहीं,
तो शायद माँ जैसा होगा,
क्योंकि इस दुनिया में
माँ से बड़ा कोई प्यार नहीं होता।
Divyansh Bhatnagar
#ZorbaStoryContest2026