व्हाट्सएप इमोजी

             

आज तुम सपने में दिखे, वही पहले की तरह हंसते- मुस्कुराते, मुझसे बतियाते. सोचा पूछ लूं कैसे हो तुम? दिमाग ने तो बहुत रोका पर दिल नहीं माना, एक व्हाट्सएप मैसेज कर ही दिया.

 

हाय, कैसे हो? 

मुझे लगा शायद तुम जवाब में मेरे बारे में पूछोगे! पुराने दिन याद करोगे.

 

मैं इन्हीं ख्यालों में खोए 1 घंटे तक तुम्हारे मैसेज का इंतजार करती रही. इसी बीच कितनी बार मैसेज चेक किए. पता था कि रिंगटोन ऑन है फिर भी बार-बार चेक करती रही! बैटरी फुल चार्ज कर ली, शायद तुम्हारा कॉल ही आ जाए! कहीं तुमसे बात करते-करते फोन डेड ना हो जाए लेकिन फोन तो डेड नहीं हुआ पर मेरे सपने जरूर डेड हो गए जब जवाब में तुमने मेरा मुंह चिढ़ाता अंगूठा मुझे दिखा दिया. 

 

दुख तो बहुत हुआ पर कोई नहीं, मैं अपने काम में लग गई. लेकिन धीरे-धीरे मुझे तुम पर गुस्सा आने लगा. बार-बार बस यही जहन में आ रहा था कि क्या तुम भूल चुके हो मुझे या मैं अब कुछ हूँ ही नहीं तुम्हारे लिए? 

 

पर दिल कह रहा था कि हो सकता है कि वह बिजी हो या हिचक रहा हो! तू ही थोड़ी बातचीत बढ़ा. मैंने फिर मैसेज किया.

 

आज तुम मुझे सपने में दिखे थे, हमारे पुराने वाले घर में, याद है तुम्हें वो घर? ??? 

 

2 घंटे बाद उसका जवाब आया, हां सब याद है और फिर गायब यानी कि ऑफलाइन और मैं सोचती रह गई की याद है तो फिर मुझे क्यों भूल गए? क्यों इतनी दूरियां बढ़ा लीं? जिगरी दोस्त होते हुए भी हमें बात करे एक अरसा हो गया. कॉलेज में तुम अपनी हर बात मुझे बताते थे. तुम्हारा हर क्रश, अफेयर, खुशी, दुख सब मुझे पता था. हमारी दोस्ती की मिसालें दी जाती थीं. मेरे मम्मी पापा भी तुम्हें कितना प्यार करते थे और तुम्हारी मां तो मुझे तुम्हारी दुल्हन बनते देखना चाहती थी! लेकिन जब हम दोनों ने ही साफ कर दिया था कि हम सिर्फ दोस्त हैं तब सबने कितना आश्चर्य किया था. "एक लड़का और एक लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते"  वाली प्रतिक्रिया थी सबकी. 

 

धीरे-धीरे सभी ने हमारी दोस्ती को स्वीकार कर लिया था. उस समय हमें —- हमें क्या सभी को लगता था कि हमारी दोस्ती हमेशा ऐसी ही रहेगी. लेकिन तब किसे पता था कि "दो जिस्म एक जान" कहलाने वाले दोस्तों के बीच भी इतनी दूरियां आ सकती हैं! 

 

तुम जॉब के लिए यूएस क्या गए सब कुछ भूल गए. मेरी मां के हाथ के पराठें, दीदी की डांट, पापा के आगे बढ़ने के टिप्स, मुझे मोटी कहकर चिढ़ाना लेकिन किसी और के ऐसा कहने पर उससे लड़ जाना, सब भूल गए. मुझ पर तो कॉपीराइट था ना तुम्हारा! अब —- अब तो तुम्हें पता भी नहीं शायद कि मैं कहां हूंँ? कैसी हूंँ, क्या कर रही हूंँ? अपने नए संसार में ऐसे खोए कि अपनों की खबर ही ना ली. कभी अपनी छींक तक मुझसे शेयर करने वाले को अब यह भी पता नहीं कि उसकी बेस्ट फ्रेंड ठीक है या नहीं! क्यों चले गए तुम इतनी दूर कि व्हाट्सएप पर भी बस अंगूठा दिखा कर फॉर्मेलिटी पूरी कर दी? क्या व्हाट्सएप के ये इमोजी हमारी दोस्ती, हमारी भावनाओं की जगह ले सकते हैं? हमारे बीच आई नामालूम सी दूरियों को कम कर सकते हैं? 

 

नहीं, बल्कि ये इमोजी तो ये अहसास कराती हैं कि तुम जिसे इतना याद करते हो उसके पास तो इतना भी समय नहीं कि वो तुम्हारे लिए दो लाइन लिख सके. ये इमोजी फासले घटाती नहीं शायद और बढ़ा देती हैं! और ये फासले दिखते नहीं, बस दिल में एक कसक छोड़ जाते हैं —- हमेशा के लिए.

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Dr. Sushma gupta