मै उसके प्यार के काबिल नही

आईना चेहरा बयान करेगा

दिल का हाल नही

मुझे उससे कोई शिकायत नही

मै उसके प्यार के काबिल नही ।

 

वो जिन राहों से गुजरती है

उन रहो पर मै कदम रखता नही

क्यो की उसके दिले गुल की खुशबू से महकती हवा मे

सांस लेने का हक मुझे हासिल नही। 

 

इतनी मासूम आँखे

जिससे बहता है आबे जम जम

करुणा, स्नेह, ममता से लबालब

मैंने देखा कही ऐसा दिल नही  

 

मुस्कराता हुआ चेहरा उसका

महकता हुआ जिस्म

दमकता हुआ हुस्न

उसको लेकर मै रहा कभी गाफ़िल नहीं। 

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Guru saran srivastava