ik shayar ki loveyatra

छीनकर के बचपन बच्चो का हम चोर बन गए।
दिये ना संस्कार उन्हे तॊ वे कुछ और बन गए।
पहले जाते थे मंदिर, फिर बाद में करते भोजन, 
वे होकर के बड़े ,नदी के दूसरे छोर बन गए ॥  

पहले जब दादू और दादी हमे कहानी सुनाते थे।
सुनाकर कहानिया हमें नैतिक सीख बताते थे॥
सुनकर कहानियाँ राम-लखन–एकलव्य की,  
इन्हें आदर्श बनाकर एक आदर्श जीवन बीताते थे॥ 

इतना सौम्य बचपन ,6 इंच के डब्बे में समेट दिया।
देकर हाथों में मोबाइल, इनका बचपन मेट दिया॥ 
कबड्डी, खो-खो,कंचे और गिल्ली–डंडा छीनकर , 
हिंसाप्रद पबजी  व वीडिओ गेम इन्हें भेंट किया॥

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jainprashuk212000