रामू की चप्पल

रामू की चप्पल

काफी दिनों से गाँव के पास वाले मन्दिर के मैदान में मेले लगने के लिए तैयारियां जोरो से हो रही थी । रामू ने सोचा अबके बाबा से पैसे लेकर मेले से अपनी मनपसंद चीजे खाऊँ गा । पर जैसे ही उसका ध्यान अपनी टूटी चप्पल पर गया मन उदास हो गया । सोचा बाबा ने पहले भी उसे पैसे दिए थे , कि अपनी चप्प्ल ठीक करवा लूँ और मैनें चप्पल को ठीक करवाया भी। पर अब तो मोची भी जवाब देने लगा है नई चप्पल ले लो भईया ।

बाबा दिहाड़ी मजदूर है , कभी- कभी तो मुझे पैसे देते हैं ऐसे नई चप्पल के लिए वो मुझे ज्यादा पैसे भी तो नहीं दे सकते । यह सब सोचकर रामू का बाल मन रुआंसा हो गया । रामू का बाल मन आखिर कब तक गम में डूबा रहता । रामू ने सोचा टूटी चप्पल कभी भी धोखा दे देगी। बस ऐसा ही सब सोच कर रामू परेशान सा हो गया। कि तभी गाँव के एक नारियल बेचने वाले सेठ ने रामू को बुलाया, और बोला कि क्या तुम मेरे नारियल एक जगह से दूसरी जगह रख दोगे ? आज मेरा एक मजदूर कम है तुम्हें पैसे भी मिलेंगे । रामू का मन मानों हिरण की तरह कुलाचे भरने लगा । उसने तुरन्त हाँ भर दी। रामू ने नारियल वाले वाले सेठ के यहाँ खूब मेहनत से काम किया , तो सेठ ने रामू को थोड़े ज्यादा पैसे दे दे दिए । रामू की पैसो को देखकर आँखे खिल उठी। इतने पैसों से चप्पल ठीक तो क्या, नई चप्पल ले सकता था और भर पेट खाना खा सकता था। मेले वाले दिन सुबह रामू जल्दी नहा लिया । बाबा से पूछकर वह मेले की तरफ रवाना हुआ। आज रामू के मन के भाव किसी राजा की तरह थे। कि आज सब कुछ उसी का है ये आसमान ये धरती , और ये पंछी । मेले में रामू ने खूब खाया पिया, झूला – झूला , कठपुतलियों का खेल देखा। रामू अब मेले में थक कर एक जगह बैठ गया। उसके मन में खुशी थी कि अभी काफी पैसे बचे थे । जिनसे नई चप्पल ले लेगा। उसे नींद की झपकी लग गई। रामू सोकर उठा तो उसके पैसे गायब थे। रामू चप्पल खरीदने के लिए पैसे ढूँढने लगा । आज वह बाबा से वादा करके आया था कि वो खुद के लिए नई चप्पल ले लेगा। वह सोच सोचकर रोने लगा। अब शाम ढलने को आई । सूरज भी दिन भर चमक कर अपनी रोशनी समेट रहा था। रामू भारी कदमों से घर की तरफ बढ रहा था। वो खुद को काफी कोस रहा था। कि आखिर वो सोया ही क्यों? अब बाबा पूछेंगे तो क्या बताएगा ? वो बेचारे दिन भर जी तोड़ मेहनत करते हैं । और मेरी ही चिंता करते रहते हैं। अब सेठ जी से पैसे माँगना भी ठीक नही है रामू घर पहुँचने वाला ही था। कि तभी किसी न रामू को पीछे से आवाज दी। अरे ये तो नारियल वाले सेठ ही हैं। लेकिन ये इस समय यहाँ क्यों आए है ? नारियल वाले सेठ ने रामू को नई चप्पल देते हुए कहा कि बेटा ये लो तुम्हारी नई चप्पले । रामू नई चप्पले देख रो पड़ा। सेठ जी ने बताया कि मेरा एक नौकर भी आज मेले में गया हुआ था। वो तुम्हें पहचानता तो है ही । जब तुम सो रहे थे, तब एक आदमी तुम्हारी जेबें टटोल रहा था। उसी ने तुम्हारे पैसे निकाल लिए। मेरे नौकर ने उसका पीछा किया। और उस आदमी को पकड़ लिया । उससे सख्ती से पूछने पर उसने अपनी गलती मान ली। और तुम्हारे पैसे मुझे लाकर दे दिए। रामू ने सेठ जी का धन्यवाद दे विदा ली। रामू कि आँखो में खुशी के आँसू थे। और बाबा की आँखो में सन्तोष के आँसू थे।

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jitesh sharma