क्या होता?

 क्या  होता? ग़र इश्क़ मैं जता देता।

इक प्यासे दरिया को समन्दर से मिला देता।। 

 

क्या होता? ग़र वो इश्क़ मेरा अपना लेता। 

रात के जुगनू को इक सितारा बना देता।। 

 

क्या होता? ग़र लंबा पेड़ खुद को झुका देता। 

नफरत की इक डाली पर मोहब्बत बिठा देता।। 

 

क्या होता? ग़र बहता पानी खुद को थाम लेता। 

फलते फूलते जीवन को पल भर में वार देता।। 

 

क्या होता? ग़र अभिमन्यु चक्रव्यूह भेद देता। 

अकेले ही भीष्मपितामह के बदन को छेद देता।। 

 

क्या होता? ग़र गरीब अमीर को झुठला देता।

फ़लक में बैठे चाँद को धूल में मिला देता।। 

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Kavi Rishabh Katiyar