बात करते हो
फिर से भरोसा करने की ?
बहुत विश्वास था खुद के विश्वास पर
आपने इतने प्यार से तोड़ा कि, फिर…
आवाज भी नहीं थी, हौंसला भी नहीं था
बारिश के बाद, डाली पर घोंसला भी नहीं था…….
इत्मीनान से बताना चाहा था खुद को
कुछ पल साथ में मुस्कुराना चाहा था
पर तब तक मज़ाक बन चुका था,
मेरे हर एक जज्बात का जो जुड़ने लगा था आपसे
क्या फर्क पड़ा अब?? दूर हो जाने दो….
क्योंकि अब पास आने का कोई रास्ता छोड़ा भी नहीं था
बात करते हो
फिर से भरोसा करने की ?