छत्तीसगढ़ी गजल 🌙
छत्तीसगढ़ी गजल 🌙
(अप्रकाशित, ठेठ छत्तीसगढ़ी बोली मं)
मतला :
मया के बात ला काबर छुपाय जाथस रे,
अंखी के पानी ले सब बताय जाथस रे।।
१
गांव के माटी के खुशबू भुलाय नई जावय,
सहर के चमक मं मन भरमाय जाथस रे।।
२
जेन मन संग चलिन दुख-सुख के डगरिया मं,
ओही मन आज मोला भुलाय जाथस रे।।
३
मांदर के थाप सुनतें मन नाच उठथे,
सुग्घर सुरता मं जीव मुस्काय जाथस रे।।
४
दाई-ददा के मया अमोल धन हवय संगी,
धन-दौलत देख के काबर इतराय जाथस रे।।
५
चंदा घलो बादर मं लुक-छिप जाथे देख,
मोर अँजोर सपना घलो हराय जाथस रे।।
मकता :
“कुलेश्वर” गावत रहिथे मया के गीत ला,
सुन के पत्थर मन घलो पिघलाय जाथस रे।।