छत्तीसगढ़ी गजल 🌙

छत्तीसगढ़ी गजल 🌙

(अप्रकाशित, ठेठ छत्तीसगढ़ी बोली मं)

मतला :

मया के बात ला काबर छुपाय जाथस रे,

अंखी के पानी ले सब बताय जाथस रे।।

गांव के माटी के खुशबू भुलाय नई जावय,

सहर के चमक मं मन भरमाय जाथस रे।।

जेन मन संग चलिन दुख-सुख के डगरिया मं,

ओही मन आज मोला भुलाय जाथस रे।।

मांदर के थाप सुनतें मन नाच उठथे,

सुग्घर सुरता मं जीव मुस्काय जाथस रे।।

दाई-ददा के मया अमोल धन हवय संगी,

धन-दौलत देख के काबर इतराय जाथस रे।।

चंदा घलो बादर मं लुक-छिप जाथे देख,

मोर अँजोर सपना घलो हराय जाथस रे।।

मकता :

“कुलेश्वर” गावत रहिथे मया के गीत ला,

सुन के पत्थर मन घलो पिघलाय जाथस रे।।

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Kuleshwar jaiswal
Chhattisgarh