भारत माता की वंदना
जय-जय भारत दाई मोर, तोर महिमा अपार।
गंगा-जमुना धार पवित्तर, सागर करे पुकार।।
हिमगिरि मुकुट सुहावन लागय, शोभा अपरंपार।
हरियर खेत, जंगल-पहाड़ी, महके तोर दुआर।।
राम-कृष्ण के पावन धरती, गौतम के संदेश।
वीर भगत अउ आजाद मन ले, गूंजय तोर परिवेश।।
तोर माटी चंदन कस महके, मया भरे अंचार।
जाति-धरम ला एक संग बांधे, बने प्रेम के हार।।
हल जोतय किसान बिहान ले, जवान रखंय मान।
महतारी खातिर अपन प्रान ला, कर देथें बलिदान।।
तिरंगा गगन मं लहर-लहरके, बढ़ावय तोर शान।
सत्य-अहिंसा के रद्दा दिखला, बने महान पहचान।।
ज्ञान-जोत ले दुनिया चमके, गूंजय जय-जयकार।
भारत दाई तोर किरपा ले, सुखी रहय संसार।।
कुलेश्वर गावत तोर महिमा, झुकाके अपन माथ।
देश-धरम खातिर जीयत रहिबो, धरके तोर हाथ।।
कवि कुलेश्वर जायसवाल
सेमरिया,कबीरधाम,छत्तीसगढ़