भाग्य
भाग्य बनाने को,
स्वयं से लड़ना पड़ता है।
मन की अनदेखी कर,
दिमाग से चलना पड़ता है।
मन मांगे विश्राम जब,
मस्तिष्क अनुमति न दे।
निरंतर अभ्यास से,
मन फिर स्थिर रहे।।
भाग्य बनाने को,
स्वयं से लड़ना पड़ता है।
मन की अनदेखी कर,
दिमाग से चलना पड़ता है।
मन मांगे विश्राम जब,
मस्तिष्क अनुमति न दे।
निरंतर अभ्यास से,
मन फिर स्थिर रहे।।