भाग्य

भाग्य बनाने को,

स्वयं से लड़ना पड़ता है।

मन की अनदेखी कर,

दिमाग से चलना पड़ता है।

मन मांगे विश्राम जब,

मस्तिष्क अनुमति न दे।

निरंतर अभ्यास से,

मन फिर स्थिर रहे।।

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Kumari Shalini