प्रेम सागर
तेरे हाथों में लेकर चुडिया
राजा जी तैयार हुए बैठें है ।
आ जाना प्यार की गुड़िया
मेहंदी लगाने बैठें है ।
नफरत के रिश्तों को
समझाया नहीं जा सकता है।
प्यार की नई बूंदों को
ठुकरा नहीं पाता हैं ।
निराशोकी किरणों से जिंदगी
नफ़रत सी होने लगी है ।
तेरी आशिकी के बूंदों से
बुराईयां भी दूर भागी जा रही है
: – LALIT DESHMUKH