किसी की बर्बादी पर……
किसी की बर्बादी पर तू ख़ुश न हो,
चाहे उसने तेरी बर्बादी पर ख़ुशी मनाई हो।
बस इतना ख़ौफ़ दिल में रख—
वो सबका हिसाब रखता है,
वो वक़्त रहते सज़ा भी देता है।
तो फिर तू किसी को कोसे क्यों,
तू क्यों किसी की गर्दिश पर ख़ुश हो?
जिस दर्द से तू गुज़रा है,
वही दर्द किसी और की दुआ न बन जाए—
बस इतना ज़र्फ़ अपने अंदर रख।
क्योंकि उसके दरबार में
न देर है, न अंधेर—
हर आँसू का हिसाब है,
हर ज़ख़्म का हिसाब है,
और हर कर्म का जवाब है।