कविता:-जुल्म् ना कर नारी पे
इसतरह जुल्म न कर किसी नारी पर
तुझे महा पाप होगा
याद रखना ए हैवान तू भी एकदिन
किसी लड़की का बाप होगा
इंसान है ओह नारी
उसको भी दर्द होता है
नारी को मारने वाले मर्द नहीं
नामर्द होता है
नारी को मारने वाले नामर्द होता है
घरका सारा काम करके
तेरे माँ बहन सबका गाली
चुप चाप सेहती है
अपना दुःख दर्द माँ बाप को भी
नहीं कहती है
तेरा घरका पूरा बोज अपने सरपे लेके
रातको तेरा साथ देती है
इसतरह जुल्म न कर नारी को
ओह भी किसीकी बेटी है
ओह भी किसीकी बेटी है