सतरंगी प्रकृति
ऐसा मौसम आज आया है
हर्ष-उल्लास मन में छाया है
पक्षीयो की कलरव से गूंजा जहां है
सुनो कान लगाके कुछ कह रहा आसमां है।।
मेघों का नृत्य समीर पर ऐसा छाया
जैसे सावन में मयूर ने नृत्य रचाया
फूलों की सुरभी से महका जहां है
सुनो कान लगाके क्या कहता आसमां है।।
मिट्टी की सोंधी खुशबू मन को लुभाई है
जैसे मृग में बसी कस्तुरी की सुगंध वन में छाईं है,
हृदय हर्ष से उमङ पङा है
प्रकृति ने सुंदर वेष धरा है
सीप स्तिथ मोती भी हर्षाया है
सुनो कान लगाके मेघों ने शुभ समाचार सुनाया है।।