जिंदगी में क्या कमी है..!!
जिंदगी में क्या कमी है,,
शायद कुछ भी नहीं,
जो है वह सही है,जो नहीं है,
क्यों उसी पर दिल कुर्बान है,
जैसे वहीं दिल में अटके अरमान है,
दूसरों की जिंदगी को खुशनुमा बनाते बनाते,
खुद की जिंदगी को भूलाते गए ,
औरो को हंसाते – हंसाते,
हम खुद हंसना भूलाते गए,
जैसे बिन स्याही के कोरे कागज,
कुछ बेबस दिल के अरमानों के सलज,
खुद को पाने कि ही तो सिर्फ अब जंग है,
सीखना सिर्फ जिंदगी जीने का ढंग है,
इस जिंदगी में कोई कमी नहीं सिर्फ,
इसमें भरने थोड़े रंग है!!
– निशिता मंगल