यही है

वफा का यह जमाना नहीं है 
शौक है तो मंजिल को पाना यही है

उससे मुलाकात दोबारा हो
ऐसा कोई बहाना नहीं है

चला था उन रास्तों पर जिन रास्तों पर अब जाना नहीं है
अब तो मेरा आशियाना यही है यही है यही है

 

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Parisa Gupta